अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म करने पर ऐतिहासिक समझौता, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा; वैश्विक बाजार में राहत

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक प्रारंभिक शांति समझौता हुआ है। समझौते के तहत युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है। पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर आगे अलग से बातचीत होगी। समझौते की खबर के बाद वैश्विक तेल कीमतों में 4% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
वॉशिंगटन/दुबई: अमेरिका और ईरान ने लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए एक प्रारंभिक शांति समझौते (Framework Agreement) पर सहमति जताई है। इस समझौते के तहत युद्धविराम लागू करने, अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी समाप्त करने और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने पर सहमति बनी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि यह समझौता पूरा हो चुका है। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि उनके देश ने वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने में सहयोग किया।
समझौते के प्रमुख बिंदु:
- स्थायी युद्धविराम लागू करने पर सहमति।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का निर्णय, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद।
- अमेरिका ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाएगा।
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत वार्ता आगामी 60 दिनों में होगी।
- समझौते के आधिकारिक हस्ताक्षर स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित हैं।
तेल बाजार में बड़ी राहत
समझौते की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 4% से अधिक गिर गईं, जबकि एशियाई शेयर बाजारों में तेजी देखी गई। निवेशकों ने इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सकारात्मक संकेत माना।
परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी रहेगी
हालांकि युद्धविराम पर सहमति बन गई है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है। दोनों देशों ने इन विषयों पर अलग से विस्तृत वार्ता करने पर सहमति व्यक्त की है।
इज़राइल-लेबनान मोर्चे पर चुनौती बरकरार
समझौते के बावजूद इज़राइल और लेबनान से जुड़े सुरक्षा मुद्दे अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। अमेरिका ने उम्मीद जताई है कि क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए आगे भी कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे।
यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो यह हाल के वर्षों में मध्य पूर्व की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक माना जाएगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।
