भागलपुर में ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन, विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन पर जनप्रतिनिधियों को दी गई जानकारी

भागलपुर के टाउन हॉल में ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन कर त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी गई। सम्मेलन में रोजगार गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिन, बेरोजगारी भत्ता, VGPP, सोशल ऑडिट, AI आधारित निगरानी और ₹300 न्यूनतम मजदूरी सहित विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में जिलाधिकारी, जिला परिषद के पदाधिकारी, निदेशक NEP सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
भागलपुर | BLive डेस्क
ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के निर्देश के आलोक में विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के संबंध में त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को जागरूक एवं प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से भागलपुर के टाउन हॉल में एक दिवसीय ‘पंच सम्मेलन’ का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में जिलाधिकारी भागलपुर, अध्यक्ष जिला परिषद, उप विकास आयुक्त, उपाध्यक्ष जिला परिषद, निदेशक, NEP, सभी प्रखंड प्रमुख, जिला परिषद के सदस्य, पंचायत समिति के सदस्य, मुखिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बताया गया कि 01 जुलाई 2026 से विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 लागू हो चुका है, जिसका क्रियान्वयन राज्य एवं जिले में किया जा रहा है। ग्रामीण भारत के सुदृढ़ विकास में त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए जनप्रतिनिधियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई।
अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
- रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया जाना।
- समय पर कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान।
- केंद्र एवं राज्य के बीच 60:40 वित्तीय साझेदारी तथा पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 की व्यवस्था।
- ग्राम पंचायतों को A, B एवं C श्रेणियों में वर्गीकृत कर आवश्यकता आधारित विकास योजना तैयार करना।
- प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) तैयार करना।
- चार प्रमुख विषयगत क्षेत्रों में 318 प्रकार के विकास कार्यों को अनुमेय बनाया जाना।
- प्रत्येक छह माह में अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) तथा साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण।
- बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियोस्पेशियल तकनीक एवं रियल-टाइम डैशबोर्ड आधारित निगरानी।
