भागलपुर में बिहुला विषहरी उत्सव का भव्य समापन, लोककला और मंजूषा चित्रकला ने मोहा मन
भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय बिहुला विषहरी उत्सव का भव्य समापन हुआ। फोटोग्राफी प्रदर्शनी, मंजूषा चित्रकला कार्यशाला, लोकनृत्य और लोकनाट्य की प्रस्तुतियों ने अंग क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। समापन पर कलाकारों एवं प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
भागलपुर | BLive डेस्क
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय बिहुला विषहरी उत्सव का भव्य समापन हुआ।
उत्सव के दौरान लोककला, फोटोग्राफी, चित्रकला, लोकनृत्य और लोकनाट्य के माध्यम से अंग क्षेत्र की समृद्ध लोक परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।
📸 फोटोग्राफी प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र
समापन दिवस पर विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा संयोजित एकल फोटोग्राफी प्रदर्शनी ‘दृष्टिकोण’ का आयोजन किया गया।
प्रदर्शनी में मानव जीवन के विभिन्न आयामों, देश के अलग-अलग हिस्सों की संस्कृति तथा लोगों के सामाजिक एवं भावनात्मक पहलुओं को तस्वीरों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
🎨 मंजूषा चित्रकला कार्यशाला में 30 से अधिक प्रतिभागी
उत्सव के दौरान दो दिवसीय मंजूषा चित्रकला कार्यशाला भी आयोजित की गई। प्रशिक्षक डॉ. उलूपी झा ने 30 से अधिक प्रतिभागियों को मंजूषा लोककला की पारंपरिक शैली, स्वरूप, विषय-वस्तु एवं चित्रांकन की बारीकियों की जानकारी दी।
इसके अलावा मंजूषा हटिया के तहत मंजूषा लोककला की समूह प्रदर्शनी लगाई गई, जिसमें कई कलाकारों ने अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित कीं।
🎭 लोकनृत्य और लोकनाट्य ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या में वरिष्ठ लोक कलाकार राजेश झा ने बिहुला विषहरी की लोकगाथा पर आधारित भगैत लोकनृत्य की प्रस्तुति दी।
इसके बाद कृष्ण क्लब द्वारा बिहुला विषहरी की लोकगाथा पर आधारित लोकनाट्य प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अभिनय और मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से लोकगाथा के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत कर दिया।
🏆 कलाकारों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के समापन अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने उत्सव में शामिल प्रतिभागियों एवं कलाकारों को प्रमाण-पत्र, अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोक परंपराओं और लोककलाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच भी प्रदान करते हैं।
📍 दो दिनों में दिखी अंग क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान
दो दिवसीय बिहुला विषहरी उत्सव में फोटोग्राफी प्रदर्शनी, मंजूषा चित्रकला कार्यशाला, मंजूषा हटिया, लोकनृत्य और लोकनाट्य की प्रस्तुतियों ने भागलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को प्रभावी ढंग से सामने रखा।
उत्सव का समापन लोक परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों के सम्मान के संकल्प के साथ हुआ।
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