बिहार में शिक्षक ट्रांसफर को लेकर बढ़ा कन्फ्यूजन, रैशनलाइजेशन से सामान्य तबादले तक कई सवाल

बिहार में शिक्षकों के रैशनलाइजेशन, म्यूचुअल और सामान्य ट्रांसफर को लेकर सोशल मीडिया व शिक्षक संगठनों में अलग-अलग दावों से भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जनगणना संबंधी ट्रांसफर रोक और सरप्लस शिक्षकों के मामले में हाईकोर्ट के आदेश को लेकर भी अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ रही हैं। शिक्षक अब शिक्षा विभाग से स्पष्ट आधिकारिक स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं।
बिहार | BLive डेस्क
बिहार में सरकारी शिक्षकों के रैशनलाइजेशन/समानुपातीकरण, म्यूचुअल ट्रांसफर और सामान्य स्थानांतरण को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। विभिन्न शिक्षक संगठनों, शिक्षक नेताओं और सोशल मीडिया एवं व्हाट्सऐप ग्रुपों में अलग-अलग तरह के संदेश प्रसारित हो रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं।
कहीं यह दावा किया जा रहा है कि जनगणना कार्य के कारण ट्रांसफर पर 31 मार्च 2027 तक रोक लग सकती है, तो कहीं यह कहा जा रहा है कि रैशनलाइजेशन की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी होगी और इसके बाद म्यूचुअल एवं सामान्य ट्रांसफर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक एवं न्यायिक दस्तावेजों को देखें तो इन दोनों बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
29 जुलाई से शुरू हुई थी ट्रांसफर प्रक्रिया
बिहार शिक्षा विभाग ने नई शिक्षक स्थानांतरण व्यवस्था के तहत 29 जुलाई से 5 अगस्त 2026 तक रैशनलाइजेशन/समायोजन और म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए थे। शिक्षा विभाग ने पूरी प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की योजना बनाई थी।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 7 अगस्त से 9 सितंबर तक समायोजन एवं समानुपातीकरण, जबकि 10 से 14 सितंबर तक म्यूचुअल ट्रांसफर की प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
इसके बाद 16 सितंबर को विद्यालयवार संशोधित रिक्तियों की सूची प्रकाशित की जानी है और 17 से 23 सितंबर तक सामान्य स्थानांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जाने हैं। सामान्य स्थानांतरण की सूची, आपत्तियों और अपीलों की प्रक्रिया 24 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच पूरी करने का कार्यक्रम बताया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश को लेकर भी भ्रम
सरप्लस शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े मामले में 17 अगस्त 2026 को पटना हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं की पोस्टिंग एवं ट्रांसफर के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि न्यायालय के आदेश में विशेष रूप से “petitioners' posting and transfer” के संबंध में यथास्थिति की बात कही गई है। इसलिए इसे पूरे बिहार के सभी शिक्षकों के ट्रांसफर पर blanket रोक के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
यही कारण है कि हाईकोर्ट के आदेश को लेकर भी शिक्षक समूहों में अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सामने आ रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि न्यायालय के आदेश का प्रभाव रैशनलाइजेशन के तहत अन्य शिक्षकों की प्रक्रिया और आगामी म्यूचुअल एवं सामान्य ट्रांसफर पर किस रूप में पड़ेगा।
जनगणना के नाम पर 31 मार्च तक रोक की चर्चा
इधर जनगणना 2027 को लेकर बिहार सरकार की ओर से जारी आदेश में जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मियों के स्थानांतरण पर की बात सामने आई है। यह रोक जनगणना की तैयारियों से जुड़े प्रशिक्षित/प्रतिनियुक्त कर्मियों पर लागू होने की जानकारी दी गई है।
