शिक्षकों के पदस्थापन और स्थानांतरण के लिए नई प्राथमिकता नीति जारी, ऑनलाइन आवेदन से होगी प्रक्रिया

शिक्षकों के पदस्थापन और स्थानांतरण के लिए नई नीति के तहत गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, विधवा/परित्यक्ता, महिला शिक्षकों समेत विभिन्न श्रेणियों को वरीयता क्रम के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षकों का हर पांच वर्ष में स्थानांतरण अनिवार्य होगा और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली से संचालित की जाएगी। शिक्षकों को पदस्थापन/स्थानांतरण के लिए 10 विकल्प देने का अवसर मिलेगा। प्रक्रिया की निगरानी के लिए जिला एवं प्रमंडल स्तर पर समितियां भी गठित की जाएंगी।
भागलपुर | BLive डेस्क
राज्य में शिक्षकों के पदस्थापन, स्थानांतरण एवं प्रतिनियुक्ति के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया सॉफ्टवेयर आधारित ऑनलाइन एप्लिकेशन के माध्यम से संचालित की जाएगी।
इन शिक्षकों को मिलेगी प्राथमिकता
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार शिक्षकों के पदस्थापन एवं स्थानांतरण में वरीयता क्रम (Order of Preference) के आधार पर प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें मुख्य रूप से—
- असाध्य रोग से पीड़ित शिक्षक
- गंभीर रूप से दिव्यांग शिक्षक
- दिव्यांगता के आधार पर विशेष श्रेणी के शिक्षक
- ऑटिज्म एवं मानसिक दिव्यांगता से संबंधित शिक्षक
- विधवा एवं परित्यक्ता महिला शिक्षक
- महिला शिक्षक
- पति के पदस्थापन स्थल के आधार पर शिक्षक
- पुरुष शिक्षक
को निर्धारित शर्तों एवं प्राथमिकता क्रम के अनुसार पदस्थापन या स्थानांतरण का लाभ दिया जाएगा।
दिव्यांगता एवं गंभीर बीमारियों के मामलों में सिविल सर्जन कार्यालय स्तर से निर्गत संबंधित प्रमाण-पत्र मान्य होगा।
हर शिक्षक का स्थानांतरण पांच वर्ष में अनिवार्य
दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों का उनके सेवाकाल के प्रत्येक पांच वर्ष पर स्थानांतरण अनिवार्य होगा। हालांकि विशेष श्रेणी के मामलों में निर्धारित प्राथमिकता एवं नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
स्थानांतरण की कार्रवाई के दौरान रिक्त पदों, छात्र-शिक्षक अनुपात, आवश्यक संरचना और उपलब्धता सहित अन्य निर्धारित मानकों को ध्यान में रखा जाएगा।
