भागलपुर में एक साल के बच्चे को मिला नया परिवार, दत्तक ग्राही दंपती को सौंपा गया

भागलपुर में दत्तक ग्रहण की वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब एक वर्ष के बच्चे को रांची के दत्तक ग्राही दंपती महेश बरई एवं पूनम देवी को सौंपा गया। प्रशासन ने बताया कि दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया मिशन वात्सल्य पोर्टल और निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत होती है। बच्चे को परिवार को सौंपे जाने के बाद भी दो वर्षों तक फॉलो-अप किया जाएगा।
भागलपुर | BLive डेस्क:
दत्तक ग्रहण की निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भागलपुर में करीब एक वर्ष आयु के एक बालक को रांची के दत्तक ग्राही दंपती महेश बरई एवं पूनम देवी को सौंपा गया। यह प्रक्रिया जिला पदाधिकारी, भागलपुर एवं सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई की उपस्थिति में पूरी की गई।
प्रशासन के अनुसार, दत्तक ग्रहण से संबंधित वाद को जिला पदाधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया गया था। दत्तक ग्रहण की अनुमति प्रदान किए जाने के निर्णय के बाद बालक को विधिवत उसके दत्तक ग्राही माता-पिता को सौंपने की कार्रवाई पूरी की गई।
ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए होता है दत्तक ग्रहण
प्रशासन ने बताया कि दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं निर्धारित वैधानिक प्रावधानों के तहत संपन्न होती है। इच्छुक दत्तक ग्राही माता-पिता मिशन वात्सल्य पोर्टल पर पंजीकरण कर इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। पंजीकरण के लिए मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और ई-मेल आईडी की आवश्यकता होती है।
पंजीकरण के बाद निकटतम विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा दत्तक ग्राही माता-पिता की होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके माध्यम से दत्तक ग्राही माता-पिता अपनी पात्रता से संबंधित जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मिशन वात्सल्य पोर्टल और निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अतिरिक्त किसी व्यक्ति, अस्पताल या नर्सिंग होम से सीधे बच्चा गोद लेना गैर-कानूनी है। दत्तक ग्रहण से जुड़ी जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया के लिए विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान अथवा जिला बाल संरक्षण इकाई से संपर्क किया जा सकता है।
बच्चे के हित में अपनाई जाती है पूरी प्रक्रिया
किसी परित्यक्त बच्चे के प्राप्त होने पर उसे निर्धारित समय के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करने और मिशन वात्सल्य पोर्टल पर पंजीकरण कराने का प्रावधान है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत बच्चे का विज्ञापन प्रकाशित किया जाता है।
यदि कोई दावेदार सामने नहीं आता है, तो बाल कल्याण समिति द्वारा बच्चे को विधिक रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त करने की कार्रवाई की जाती है। इसके बाद ऑनलाइन मैचिंग, एडॉप्शन कमेटी की बैठक और विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान की प्रक्रिया के माध्यम से दत्तक ग्रहण वाद जिला पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है।
दत्तक ग्रहण के बाद भी प्रक्रिया समाप्त नहीं होती। बच्चे को दत्तक परिवार को सौंपे जाने के बाद दो वर्षों तक फॉलो-अप किया जाता है, ताकि बच्चे के हित और समुचित देखभाल की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
नए परिवार का हिस्सा बना बच्चा
भागलपुर से बच्चे को विधिवत गोद लेने के बाद दत्तक ग्राही दंपती के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। इस अवसर पर उन्होंने भावुकता और प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बच्चे को अपने परिवार का हिस्सा बनाने पर खुशी जाहिर की।
इस अवसर पर सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, समन्वयक, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान सहित अन्य संबंधित कर्मी मौजूद रहे।
