बाढ़ राहत शिविरों में गूंज रही मंजूषा कला की रंगीन रेखाएं, रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ रहे बाढ़ पीड़ित बच्चे

बाढ़ राहत शिविरों में बच्चों के बीच मंजूषा कला की पहल भागलपुर के तीन बाढ़ राहत शिविरों—चर्चीट मैदान, पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान और टीएनबी कॉलेजिएट—में बाढ़ पीड़ित बच्चों को मंजूषा कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उनकी सांस्कृतिक जड़ों और आत्मविश्वास को मजबूत करना है। प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी राहत शिविरों का दौरा कर बच्चों की कला गतिविधियों का अवलोकन किया।
भागलपुर | BLive डेस्क
भागलपुर जिले में आई भीषण बाढ़ के बीच जिला प्रशासन की ओर से संचालित राहत शिविरों में बच्चों को तनावपूर्ण परिस्थितियों से उबारने और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसी क्रम में कला एवं संस्कृति विभाग के सहयोग से तीन बाढ़ राहत शिविरों—चर्चीट मैदान, पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान तथा टीएनबी कॉलेजिएट—में बाढ़ पीड़ित बच्चों के लिए मंजूषा कला प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर देने के साथ-साथ उन्हें अंग क्षेत्र की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को मंजूषा चित्रकला की मूल तकनीकों के साथ बिहुला-विषहरी की लोकगाथा, मंजूषा कला की परंपरा और उसके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी भी दी जा रही है।
चर्चीट मैदान में विशुद्ध मिश्रा और हिना कुमारी, टीएनबी कॉलेजिएट में डॉ. उलूपी झा तथा पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में मंजूषा गुरु मनोज पंडित द्वारा बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों ने पेंसिल और रंगों के माध्यम से मंजूषा कला की पारंपरिक आकृतियों एवं कथात्मक तत्वों को कागज पर उकेरा।
राहत शिविरों का मंत्री ने किया निरीक्षण
भागलपुर के प्रभारी मंत्री नीतीश मिश्रा ने भी चर्चीट मैदान एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान स्थित बाढ़ राहत शिविरों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने मंजूषा कला का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों की गतिविधियों का अवलोकन किया और उनके द्वारा बनाए जा रहे चित्रों में रुचि दिखाई।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा वर्षभर विभिन्न प्रशिक्षण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, लेकिन राहत शिविरों में आयोजित यह प्रशिक्षण विशेष महत्व रखता है। उनके अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में होने वाली मंजूषा प्रशिक्षण कार्यशालाओं तक कई बच्चे नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे समय में शिविरों तक कला को पहुंचाना बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने का प्रयास है।
मंजूषा गुरु मनोज पंडित ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच बच्चों को अपनी संस्कृति और कला से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं प्रशिक्षक ने इस पहल को बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि रचनात्मक गतिविधियां बच्चों को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में मदद करती हैं और कठिन परिस्थितियों में एक तरह से की भूमिका निभा सकती हैं।
