सरप्लस शिक्षकों की फाइनल सूची के बाद भी योगदान का इंतजार, नए विद्यालय जाने को तैयार शिक्षक; विभागीय प्रक्रिया की रफ्तार पर उठ रहे सवाल

सरप्लस शिक्षकों की फाइनल स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद अब शिक्षक नए विद्यालय में योगदान का इंतजार कर रहे हैं। कई शिक्षक लंबी दूरी तय कर वर्तमान विद्यालय पहुंच रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग चर्चाएं चल रही हैं। शिक्षक विभाग से योगदान की तारीख और आगे की प्रक्रिया जल्द स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
पटना | BLive डेस्क
बिहार में सरप्लस शिक्षकों के स्थानांतरण की फाइनल सूची सामने आने के बाद अब शिक्षकों की नजर नए विद्यालय में योगदान की प्रक्रिया पर टिकी है। फाइनल सूची जारी हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में शिक्षक अभी यह स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं कि आवंटित विद्यालय में योगदान की प्रक्रिया कब और किस आदेश के तहत शुरू होगी। इसके कारण शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
फाइनल सूची के बाद अब योगदान का इंतजार
शिक्षा विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सरप्लस शिक्षकों के समायोजन के तहत अधिशेष शिक्षकों को उन विद्यालयों में पदस्थापित किया जाना है, जहां शिक्षकों की आवश्यकता है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में 10 से 14 सितंबर के बीच सरप्लस एवं पारस्परिक स्थानांतरण की प्रक्रिया तथा विद्यालय आवंटन की कार्रवाई और इसके बाद 15 सितंबर से नए विद्यालय में योगदान शुरू होने की जानकारी दी गई थी।
अब फाइनल सूची सामने आने के बाद शिक्षक यह जानना चाहते हैं कि उनके आवंटित विद्यालय में योगदान की वास्तविक प्रक्रिया कब शुरू होगी। कई शिक्षकों का कहना है कि उन्हें विद्यालय का आवंटन मिल चुका है और वे नए विद्यालय में योगदान के लिए तैयार हैं, लेकिन आगे की विभागीय प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होने से वे वर्तमान विद्यालय और नए विद्यालय के बीच स्थिति को लेकर असमंजस में हैं।
कई शिक्षकों के लिए लंबी दूरी बनी बड़ी परेशानी
सरप्लस शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी चिंता लंबी दूरी तय कर वर्तमान विद्यालय पहुंचने को लेकर भी है। कई शिक्षकों का कहना है कि वे प्रतिदिन दो से तीन घंटे तक यात्रा करके विद्यालय पहुंच रहे हैं।
कुछ शिक्षकों के अनुसार उन्हें अत्यधिक व्यस्त सड़कों और लंबे रूट से होकर रोजाना आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में समय और आर्थिक खर्च के साथ सड़क सुरक्षा का जोखिम भी बना रहता है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय तक रोजाना इतनी दूरी तय करना उनके लिए कठिन होता जा रहा है।
नए विद्यालय में जाना चाहते हैं शिक्षक
जिन शिक्षकों को नए विद्यालय का आवंटन मिल चुका है, उनमें से बड़ी संख्या अब जल्द से जल्द योगदान की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद कर रही है।
दरअसल, स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया का मूल उद्देश्य ही विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता को संतुलित करना है। जहां किसी विद्यालय में आवश्यकता से अधिक शिक्षक हैं, वहां से शिक्षकों को उन विद्यालयों में भेजा जाना है जहां शिक्षकों की कमी है।
ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि यदि विद्यालय आवंटन हो चुका है तो जल्द योगदान होने से दोनों स्तर पर व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
सरप्लस विद्यालय में काम के बंटवारे को लेकर भी स्थिति
शिक्षकों का यह भी कहना है कि जिस विद्यालय में निर्धारित आवश्यकता से अधिक शिक्षक पहले से कार्यरत हैं, वहां अतिरिक्त शिक्षक के रूप में काम करने की स्थिति उनके मनोबल को प्रभावित कर सकती है।
इसके विपरीत जिन विद्यालयों में शिक्षक कम हैं, वहां नए शिक्षकों के पहुंचने से कक्षाओं का संचालन अधिक व्यवस्थित हो सकता है और विद्यार्थियों की पढ़ाई को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
