हिंदी दिवस पखवाड़ा पर कवि सम्मेलन का आयोजन, साहित्यकारों और शिक्षकों ने दी हिंदी को आगे बढ़ाने की सीख

बाराहाट के विजय कॉलोनी स्थित सी. राज कोचिंग परिसर में हिंदी दिवस पखवाड़ा के अवसर पर कुशवाहा साहित्यिक मंच एवं सावित्री आंतरिक सेवा ट्रस्ट की ओर से कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। साहित्यकारों और शिक्षकों ने हिंदी के महत्व पर विचार रखे तथा गीत, ग़ज़ल और कविताओं की प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में हिंदी के प्रचार-प्रसार, शुद्ध लेखन और नई पीढ़ी को हिंदी से जोड़ने पर जोर दिया गया।
भागलपुर | BLive डेस्क
बाराहाट के विजय कॉलोनी स्थित सी. राज कोचिंग परिसर में हिंदी दिवस पखवाड़ा के अवसर पर कुशवाहा साहित्यिक मंच एवं सावित्री आंतरिक सेवा ट्रस्ट की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिंदी भाषा के महत्व पर अपने विचार रखे और कविता, गीत व ग़ज़ल की प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुशवाहा साहित्यिक मंच के संस्थापक साहित्यकार हरे राम निराला, ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. योगेश कौशल, कार्यक्रम अध्यक्ष एवं शिक्षक मणि प्रसाद मंडल, संरक्षक प्रोफेसर सुदामा महतो, स्काउट के जिला प्रशिक्षक मुकेश आजाद, उपाध्यक्ष चंदन राज, अंग्रेजी शिक्षक अमित कुमार, साहित्यकार राम जी यादव और आदित्य उपाध्याय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इसके बाद डॉ. योगेश कौशल ने मंगलाचरण के साथ कवि सम्मेलन की शुरुआत की। साहित्यकार हरे राम निराला ने हिंदी के प्रति जागरूकता का संदेश देते हुए कहा, “हिंदी हमारी भाषा, पढ़ना है, आगे बढ़ाना है और हर राज्य व देश में सम्मान दिलाना है।”
वहीं स्काउट के जिला प्रशिक्षक मुकेश आजाद ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से हिंदी को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हिंदी है हमारी भाषा, पढ़ेंगे-लिखेंगे, सबको बताएंगे, हिंदी को आगे बढ़ाएंगे।”
कवि सम्मेलन में मौजूद साहित्यकारों और शिक्षकों ने हिंदी दिवस के अवसर पर एक से बढ़कर एक गीत, ग़ज़ल और काव्य प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम को साहित्यिक रंग दिया। उपस्थित लोगों ने भी कवियों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शिक्षक मणि प्रसाद मंडल ने अपने संबोधन में हिंदी के व्यापक सम्मान और प्रयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी हिंदुस्तान की भाषा है और इसे हर राज्य में समान सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी बोलने और पढ़ने वाले लोग भी कई बार इसे शुद्ध रूप से लिख नहीं पाते। हिंदी को सही तरीके से सीखने और लिखने के लिए निरंतर अभ्यास और मेहनत की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, शुद्ध लेखन और नई पीढ़ी में हिंदी के प्रति रुचि विकसित करने पर भी जोर दिया गया। आयोजन ने साहित्य और शिक्षा से जुड़े लोगों को हिंदी के प्रति अपनी जिम्मेदारी और जुड़ाव व्यक्त करने का अवसर दिया।
