भागलपुर में पांच दिवसीय स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला का समापन, प्रशिक्षुओं ने सीखी रचनात्मक तकनीकें

भागलपुर संग्रहालय परिसर में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित पांच दिवसीय स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला का समापन हुआ। प्रशिक्षुओं ने स्क्रीन प्रिंटिंग की तकनीक सीखने के साथ मंजूषा कला और स्थानीय सांस्कृतिक रूपांकनों को कपड़े, कागज और अन्य माध्यमों पर प्रस्तुत किया। तैयार कलाकृतियों को 6 अक्टूबर को आयोजित होने वाली मंजूषा हटिया में प्रदर्शित किया जाएगा।
भागलपुर | B Live डेस्क
भागलपुर में ‘युवा अभिव्यक्ति कार्यशाला श्रृंखला’ के तहत आयोजित पांच दिवसीय स्क्रीन प्रिंटिंग कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन, भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यशाला भागलपुर संग्रहालय परिसर में 25 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित की गई।
कार्यशाला के अंतिम दिन प्रशिक्षुओं ने प्रशिक्षण के दौरान सीखी तकनीकों का व्यावहारिक प्रयोग करते हुए अपने तैयार डिजाइनों को कागज, कपड़े, अंगवस्त्र, दुपट्टे, रुमाल सहित विभिन्न माध्यमों पर स्क्रीन प्रिंट किया। प्रशिक्षुओं को स्क्रीन की तैयारी, डिजाइन की सही स्थिति निर्धारित करने, इंक के उचित प्रयोग तथा स्क्वीजी के माध्यम से डिजाइन को सतह पर स्थानांतरित करने की तकनीक का अभ्यास कराया गया।
प्रशिक्षण आशुतोष कुमार उर्फ उदय कुमार के मार्गदर्शन में संचालित हुआ। प्रशिक्षुओं ने अपनी रचनात्मक सोच के आधार पर विभिन्न डिजाइन तैयार किए और उन्हें अलग-अलग माध्यमों पर प्रिंट करने का प्रयोग किया।
कार्यशाला में आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र से जुड़े कलाकारों ने अपने शर्ट पर आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र का लोगो स्क्रीन प्रिंट के माध्यम से अंकित किया। वहीं, प्रशिक्षुओं ने मंजूषा कला के पारंपरिक रूपांकनों एवं आकृतियों को भी स्क्रीन प्रिंटिंग के जरिए अंगवस्त्र, दुपट्टे, रुमाल, कागज और अन्य वस्त्रों पर प्रस्तुत किया।
कार्यशाला के दौरान जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन की ओर से भी एक रचनात्मक प्रयोग किया गया। जिला प्रशासन द्वारा आयोजित बाढ़ राहत शिविरों में बाढ़ प्रभावित बच्चों के लिए आयोजित मंजूषा कला कार्यशाला के दौरान बच्चों द्वारा बनाई गई मंजूषा चित्रकृतियों को स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक के माध्यम से शर्ट, कागज एवं अन्य वस्तुओं पर उकेरा गया।
अंकित रंजन ने कहा कि स्क्रीन प्रिंटिंग जैसी तकनीक पारंपरिक कला और समकालीन प्रयोग के बीच सेतु का काम कर सकती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से कार्यशाला में सीखी तकनीक को केवल अभ्यास तक सीमित न रखते हुए मौलिक डिजाइन, स्थानीय कला एवं सांस्कृतिक पहचान को नए माध्यमों में प्रस्तुत करने के लिए प्रयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने बताया कि कार्यशाला के दौरान तैयार की गई कलाकृतियों एवं प्रिंट को आगामी ‘मंजूषा हटिया’ में प्रदर्शित किया जाएगा। मंजूषा हटिया का आयोजन 6 अक्टूबर 2026 को भागलपुर संग्रहालय परिसर में किया जाएगा।
कार्यशाला श्रृंखला के तहत अगला प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 से 10 अक्टूबर 2026 तक भागलपुर संग्रहालय में आयोजित किया जाएगा। इसमें माली एवं महिला कलाकारों के लिए मंजूषा कला प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कला परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना, कलाकारों को नए माध्यमों एवं तकनीकों से परिचित कराना तथा पारंपरिक कला को समकालीन संदर्भों में आगे बढ़ाने के लिए रचनात्मक अवसर उपलब्ध कराना है।
