राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का भव्य समापन, बिहार बनेगा देश का नंबर-1 आम उत्पादक राज्य

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का भव्य समापन हुआ, जिसमें 8 राज्यों से 1,100+ किस्मों की 2,000+ प्रविष्टियाँ शामिल हुईं। खराब मौसम के कारण राज्यपाल व कृषि मंत्री पटना से वर्चुअल जुड़े। राज्यपाल ने बिहार के आम को देश का सर्वश्रेष्ठ बताया, जबकि कृषि मंत्री ने जर्दालू आम की विश्वभर में पहचान का जिक्र किया। विभिन्न श्रेणियों में किसानों, छात्रों व महिला उद्यमियों को सम्मानित किया गया।
भागलपुर | BLive डेस्क
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय आम समागम-सह-कार्यशाला का आज भव्य समापन हुआ। देश के आठ राज्यों से आम की लगभग 1,100 से अधिक किस्मों की कुल 2,000 से अधिक प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। कार्यक्रम के दौरान किसानों ने तकनीकी सत्रों में आम उत्पादन के विभिन्न वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
खराब मौसम के कारण नहीं पहुंच सके राज्यपाल, वर्चुअल माध्यम से जुड़े
समापन समारोह में माननीय राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) तथा बिहार सरकार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा को प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित होकर भाग लेना था, किन्तु भागलपुर हवाई अड्डे पर दृश्यता कम होने के कारण विमान की लैंडिंग संभव नहीं हो सकी और विमान वापस पटना लौट गया। इसके बावजूद कार्यक्रम निर्धारित समय पर प्रारंभ हुआ तथा दोनों गणमान्य अतिथि लोक भवन, पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े और आम उत्पादक किसानों को संबोधित किया।
कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से भागलपुर के सांसद श्री अजय मंडल, भागलपुर के विधायक श्री रोहित पांडे, सुल्तानगंज के विधायक श्री ललित नारायण मंडल, पीरपैंती के विधायक श्री मुरारी पासवान तथा आईसीएआर, नई दिल्ली के सहायक निदेशक (उद्यानिकी) डॉ. विश्वबंधु पटेल उपस्थित रहे। माननीय कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत किया।
राज्यपाल सह कुलाधिपति ने अपने संबोधन में कहा कि वे कार्यक्रम में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने के लिए अत्यंत उत्साहित थे, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि आम प्रकृति की अनुपम देन है तथा इसका सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व भी अत्यंत समृद्ध है। प्राचीन काल से बिहार आम उत्पादन के लिए प्रसिद्ध रहा है और वैशाली एवं नालंदा के आम्रवनों का उल्लेख अनेक ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलता है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं लखनऊ के रहने वाले हैं और उन्हें हमेशा लगता था कि वहां का आम सर्वश्रेष्ठ है, लेकिन बिहार आने के बाद उन्हें अनुभव हुआ कि । उन्होंने सुझाव दिया कि अगले वर्ष इस आयोजन का समय मौसम को ध्यान में रखते हुए कुछ पहले निर्धारित किया जाए तथा आश्वासन दिया कि वे अगले वर्ष स्वयं इस कार्यक्रम में अवश्य शामिल होंगे।
