भारत का रक्षा क्षेत्र ऐतिहासिक बदलाव के दौर में: उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ के पार, 80 से अधिक देशों को निर्यात

भारत का रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भरता के पथ पर तेजी से आगे बढ़ते हुए एक ग्लोबल पावरहाउस बन गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.51 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। स्टील्थ फाइटर और मिसाइल प्रोजेक्ट्स में प्राइवेट सेक्टर की 23% तक बढ़ी भागीदारी, ₹7.85 लाख करोड़ का ऐतिहासिक बजट, आर्मेनिया जैसे देशों को हो रही हथियारों की सप्लाई और अमेरिका के साथ 10 साल का नया रक्षा समझौता (2025-2035) यह साफ दर्शाता है कि भारत अब रक्षा उपकरणों के आयातक से एक प्रमुख निर्यातक देश बन चुका है।
नई दिल्ली | BLive डेस्क
भारत का रक्षा क्षेत्र इस समय आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) के एक अभूतपूर्व दौर से गुजर रहा है। घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) के रिकॉर्ड तोड़ आंकड़ों और वैश्विक निर्यात बाजार में मजबूत पकड़ के साथ, भारत अब एक रक्षा आयातक देश से बदलकर दुनिया के लिए एक बड़ा डिफेंस हार्डवेयर पावरहाउस बनता जा रहा है।
आंकड़ों में रिकॉर्ड तोड़ कामयाबी
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) और रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के रक्षा उत्पादन और वैश्विक निर्यात में भारी उछाल देखा गया है:
- रिकॉर्ड उत्पादन: वित्तीय वर्ष 2024–25 में कुल रक्षा उत्पादन ₹1.51 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।
- ग्लोबल एक्सपोर्ट: भारत का रक्षा निर्यात ₹38,424 crore के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसके तहत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण भेजे जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम, स्वाति रडार और बोइंग व लॉकहीड मार्टिन जैसी वैश्विक कंपनियों को सप्लाई किए जाने वाले एयरोस्पेस कंपोनेंट्स शामिल हैं।
- ऐतिहासिक बजट: इस पूरी रफ्तार को बनाए रखने के लिए सरकार ने ₹7.85 लाख करोड़ का ऐतिहासिक रक्षा पूंजीगत (कैपिटल) बजट आवंटित किया है।
प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और आत्मनिर्भरता
इस विकास की सबसे बड़ी खासियत रक्षा परियोजनाओं में निजी कंपनियों (प्राइवेट सेक्टर) की बढ़ती भागीदारी है। अब घरेलू उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 23% हो गया है।
'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत, पूंजीगत अधिग्रहण बजट का लगभग 65-75% हिस्सा पूरी तरह से घरेलू खरीद के लिए सुरक्षित (रिंग-फेंस्ड) कर दिया गया है। रक्षा मंत्रालय ने अब स्टील्थ फाइटर (लड़ाकू विमान) और एडवांस मिसाइल प्रोजेक्ट्स को भी निजी कंपनियों के लिए खोल दिया है। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत आगे बढ़ रहा है।
