सिर्फ 10 रुपये में एंट्री… अंदर खरीदारी भी, खाना भी—सैंडिस कंपाउंड में आखिर चल क्या रहा है?

भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में लगा खादी ग्रामोद्योग मेला लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जहां स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी के साथ खान-पान का भी आनंद लिया जा रहा है। खादी ग्रामोद्योग मेला प्रबंधन द्वारा प्रवेश के लिए 10 रुपये का टिकट रखा गया है, जिससे बड़ी संख्या में लोग मेले में पहुंच रहे हैं और स्थानीय कारीगरों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।
भागलपुर | BLive Desk
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड परिसर में इन दिनों खादी ग्रामोद्योग मेला लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जैसे ही शाम होती है, पूरा परिसर रौशनी और चहल-पहल से भर उठता है और बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचने लगते हैं। हर उम्र के लोग—बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक—इस मेले में घूमते, देखते और खरीदारी करते नजर आ रहे हैं।
इस मेले की खास बात यह है कि यहां आपको स्वदेशी और हैंडमेड उत्पादों की बड़ी विविधता एक ही जगह पर देखने को मिलती है। स्टॉलों पर खादी के कपड़े, हस्तशिल्प, लकड़ी के उत्पाद, सजावटी सामान और रोजमर्रा की उपयोगी चीजें सजी हुई हैं, जो सीधे स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई हैं। यही वजह है कि लोग न सिर्फ खरीदारी कर रहे हैं, बल्कि इन उत्पादों के पीछे की मेहनत और कला को भी करीब से महसूस कर रहे हैं।
मेले का अनुभव सिर्फ शॉपिंग तक सीमित नहीं है। यहां पहुंचने वाले लोग खान-पान के स्टॉल पर अलग-अलग तरह के व्यंजनों का आनंद भी ले रहे हैं, जिससे पूरे माहौल में एक उत्सव जैसा रंग भर गया है। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए यह जगह लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है।
इस पूरे आयोजन की एक और दिलचस्प बात यह है कि खादी ग्रामोद्योग मेला प्रबंधन द्वारा प्रवेश के लिए मात्र 10 रुपये का टिकट शुल्क रखा गया है, जिससे हर वर्ग के लोग आसानी से मेले का हिस्सा बन पा रहे हैं। यही कारण है कि यहां भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है और मेले का आकर्षण दिन-ब-दिन बढ़ता दिख रहा है।
खादी ग्रामोद्योग द्वारा ऐसे मेले समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को बाजार उपलब्ध कराना, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होता है। भागलपुर में लगा यह मेला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मेला सिर्फ खरीदारी का नहीं, बल्कि परंपरा, कला और स्वदेशी संस्कृति से जुड़ने का एक जीवंत अनुभव बन गया है, जिसे देखने और महसूस करने के लिए लोग बार-बार यहां आना चाहते हैं।
