भागलपुर में संरक्षित हो रही प्राचीन ज्ञान परंपरा, 11 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण पूरा

भागलपुर में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत अब तक 11,614 प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है। महर्षि मेंहि आश्रम सहित कई संस्थानों से दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथों को डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है। वहीं 14 मई को भागलपुर संग्रहालय में नवस्थापित पुस्तकालय का उद्घाटन भी किया जाएगा।
नई दिल्ली | BLive Desk
भागलपुर में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और सर्वेक्षण का बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार एवं बिहार सरकार के संयुक्त प्रयास से अब तक जिले में 11,614 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण किया जा चुका है।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि चंपापुर दिगंबर जैन मंदिर, शाह मार्केट स्थित पीर दमड़िया, तिलकामांझी विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी, भागलपुर संग्रहालय समेत कई स्थानों से प्राप्त प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों और दस्तावेजों को डिजिटल रूप से संरक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिन लोगों या संस्थाओं के पास दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं, वे ज्ञान भारतम् मिशन मोबाइल ऐप के माध्यम से उनकी जानकारी साझा कर सकते हैं। पांडुलिपियों का स्वामित्व संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही रहेगा। मिशन का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित कर शोध और प्रकाशन के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
अंकित रंजन ने बताया कि पांडुलिपियों में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और साहित्यिक महत्व के हस्तलिखित दस्तावेज शामिल हैं, जिनकी आयु कम से कम 75 वर्ष होनी चाहिए। ये कागज, ताड़पत्र, कपड़े या अन्य माध्यमों पर लिखी हो सकती हैं।
इसी क्रम में महर्षि मेंहि आश्रम, कुप्पा घाट में 705 पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कार्य पूरा किया गया। महर्षि मेंहि द्वारा लिखित एवं संकलित इन ग्रंथों में अंग संस्कृति, न्याय धर्म और लघु कथाओं का विशेष संग्रह मौजूद है।
भागलपुर संग्रहालय में नवस्थापित पुस्तकालय का उद्घाटन 14 मई को किया जाएगा। इस अवसर पर सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन भी प्रस्तावित है।
