मंजू हटिया बना कलाकारों के लिए नई उम्मीद, चौथे संस्करण में 15 हजार से अधिक का कारोबार

भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित मंजूषा हटिया-सह-मंजूषा लोक कला प्रदर्शनी के चौथे संस्करण में स्थानीय कलाकारों को अपनी कृतियां सीधे लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिला। आयोजन में 15 हजार रुपये से अधिक की बिक्री हुई, जबकि मंजूषा कला से डिजाइन की गई 20 से अधिक टी-शर्ट भी बिकीं। खास बात यह रही कि कलाकारों से स्टॉल या प्रदर्शनी के लिए कोई शुल्क नहीं लिया गया और बिक्री की पूरी राशि सीधे कलाकारों को मिली। यह पहल मंजूषा कला के संरक्षण के साथ कलाकारों को बाजार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
भागलपुर / BLive डेस्क:
अंग संस्कृति की विशिष्ट लोक चित्रकला मंजूषा कला के संरक्षण, संवर्धन और स्थानीय कलाकारों को सीधे बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भागलपुर में आयोजित मंजूषा हटिया-सह-मंजूषा लोक कला प्रदर्शनी लगातार अपनी पहचान मजबूत कर रही है। रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में इसके चौथे संस्करण का आयोजन किया गया, जिसमें कलाकारों ने अपनी कृतियों का प्रदर्शन करने के साथ ही आम लोगों को सीधे बिक्री का अवसर भी दिया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि कलाकारों से प्रदर्शनी अथवा स्टॉल के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया गया। कृतियों की बिक्री से प्राप्त पूरी राशि सीधे कलाकारों को मिली। इससे स्थानीय कलाकारों को आर्थिक सहयोग के साथ अपनी कला को लोगों तक पहुंचाने का एक प्रभावी मंच मिल रहा है।
हर महीने के पहले रविवार को आयोजन
जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर और भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मंजूषा हटिया प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल मंजूषा कला की प्रदर्शनी लगाना नहीं, बल्कि कलाकारों और आम लोगों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना तथा इस पारंपरिक कला के लिए एक स्थायी बाजार तैयार करना भी है।
चौथे संस्करण में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों से आए लोक कलाकारों ने मंजूषा कला से जुड़ी विभिन्न प्रकार की कृतियां प्रदर्शित कीं। पारंपरिक मंजूषा चित्रों के साथ कलाकारों ने आधुनिक उपयोग की वस्तुओं और नए माध्यमों में भी इस कला को प्रस्तुत किया, जिसे कला प्रेमियों और खरीदारों ने काफी सराहा।
15 हजार से अधिक की कृतियों की बिक्री
आयोजन के दौरान विभिन्न कलाकारों की कृतियों की बिक्री से 15 हजार रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। राशि भले ही पहली नजर में बहुत बड़ी न लगे, लेकिन स्थानीय और पारंपरिक कला के संदर्भ में इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
आयोजकों के अनुसार, छोटी-छोटी बिक्री भी कलाकारों के लिए लगातार काम करने, नई कृतियां तैयार करने और अपनी कला को जीवित रखने का आधार बनती है। प्रत्येक माह आयोजित होने वाले इस मंच से कलाकारों में यह विश्वास बढ़ रहा है कि उनकी कला के लिए दर्शक और खरीदार दोनों मौजूद हैं।
