निर्माणाधीन फोरलेन पर भीषण हादसा, थार-ट्रक की टक्कर में 2 की मौत; 1 गंभीर

भागलपुर के अकबरनगर थाना क्षेत्र में मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन के भवनाथपुर/खैरहिया के पास थार और ट्रक की आमने-सामने टक्कर में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। हादसे के बाद सड़क सुरक्षा और निर्माणाधीन मार्ग पर सुरक्षित यातायात व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।
भागलपुर | B Live डेस्क
भागलपुर जिले के अकबरनगर थाना क्षेत्र में मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन के भवनाथपुर/खैरहिया के पास रविवार सुबह थार और ट्रक की आमने-सामने की भीषण टक्कर में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के कारणों की पुलिस जांच कर रही है।
हादसा करीब सुबह 10:30 बजे हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, थार अकबरनगर की ओर से भागलपुर की तरफ जा रही थी, जबकि सामने से आ रहे ट्रक से उसकी टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि थार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस और स्थानीय लोगों ने राहत-बचाव कार्य किया।
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन परियोजना के कुछ हिस्सों को हाल में यातायात के लिए खोला गया है, जबकि परियोजना के कुछ हिस्सों में अभी निर्माण और अस्थायी यातायात व्यवस्था जारी है। ऐसे स्थानों पर लेन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
हादसे से क्या सबक?
यह दुर्घटना केवल एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि नई और निर्माणाधीन सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। B Live के सड़क सुरक्षा अभियान के तहत ऐसे हादसों से सबक लेते हुए केवल हादसे के बाद राहत-बचाव पर नहीं, बल्कि हादसे रोकने वाली व्यवस्था पर भी चर्चा जरूरी है।
हादसे रोकने के लिए जरूरी कदम
- दोनों दिशाओं के यातायात को स्पष्ट रूप से अलग किया जाए, खासकर जहां एक ही लेन से दोनों तरफ वाहन चल रहे हों।
- निर्माणाधीन हिस्सों में स्पष्ट बैरिकेडिंग, डिवाइडर और रिफ्लेक्टिव संकेतक लगाए जाएं।
- डायवर्जन, मोड़ और लेन बदलने वाले स्थानों पर स्पीड लिमिट और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
- रात में पर्याप्त प्रकाश और रिफ्लेक्टिव रोड मार्किंग की व्यवस्था हो।
- भारी वाहनों की गति और लेन अनुशासन पर नियमित निगरानी की जाए।
- संवेदनशील स्थानों पर स्पीड कैमरा/ANPR कैमरा लगाने पर विचार किया जाए।
- सड़क निर्माण एजेंसी और प्रशासन की ओर से नियमित सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
- निर्माणाधीन हिस्सों में अस्थायी यातायात व्यवस्था को स्पष्ट और सुरक्षित बनाया जाए।
- हादसे वाले स्थानों की पहचान कर वहां ब्लैक स्पॉट सुधार योजना लागू की जाए।
- वाहन चालक नई सड़क देखकर गति न बढ़ाएं और डायवर्जन तथा लेन व्यवस्था को समझकर ही आगे बढ़ें।
फोरलेन का उद्देश्य यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाना है, लेकिन सड़क की गति के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होना जरूरी है। विकास की नई सड़कें तभी वास्तव में उपयोगी साबित होंगी, जब वे तेज यात्रा के साथ सुरक्षित यात्रा भी सुनिश्चित करेंगी।
