खराब होने से पहले ट्रांसफॉर्मर की होगी पहचान, हर माह 33% ट्रांसफॉर्मरों का निरीक्षण: डॉ. नवल किशोर चौधरी

बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के एमडी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बिजली व्यवस्था में प्रिवेंटिव मेंटेनेंस पर जोर दिया है। हर माह 33% ट्रांसफॉर्मरों का जेई और 10% का एई स्तर पर निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही ट्रांसफॉर्मरों और अन्य विद्युत उपकरणों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, ताकि खराबी आने से पहले ही आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
Bhagalpur | BLive Desk
बिहार की बिजली व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में अब ‘क्योर’ के बजाय ‘प्रिवेंशन’ यानी खराबी आने से पहले उसकी पहचान पर जोर दिया जा रहा है। बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के एमडी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने ट्रांसफॉर्मरों के नियमित निरीक्षण और उनके हेल्थ स्टेटस की निगरानी को लेकर यह बात कही।
डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि अभी तक बिजली विभाग का काम काफी हद तक आउटपुट ओरिएंटेड रहा है। ट्रांसफॉर्मर खराब होने के बाद उसे ठीक करना, तार ढीला होने पर उसे टाइट करना जैसी समस्याओं का समाधान किया जाता था। अब व्यवस्था को इस दिशा में ले जाया जा रहा है कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने से पहले ही उसकी स्थिति का पता चल सके।
उन्होंने बताया कि सचिव के निर्देश के अनुसार प्रत्येक माह 33 प्रतिशत ट्रांसफॉर्मरों का निरीक्षण जेई और 10 प्रतिशत ट्रांसफॉर्मरों का निरीक्षण एई स्तर के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके बाद एग्जीक्यूटिव स्तर के अधिकारी भी निरीक्षण करेंगे।
इस व्यवस्था से विभाग को पहले ही यह पता चल सकेगा कि कौन-सा ट्रांसफॉर्मर खराब होने की स्थिति में पहुंच रहा है और किसे समय रहते बदलने या दुरुस्त करने की जरूरत है। इससे अचानक ट्रांसफॉर्मर खराब होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।
डॉ. चौधरी ने कहा कि निश्चित रूप से व्यवस्था में कुछ कमियां रहेंगी, लेकिन जब यह सिस्टम पूरी तरह स्थापित हो जाएगा तो विभाग को यह भी पता होगा कि कौन-सा ट्रांसफॉर्मर खराब होने वाला है और किसे बदलने की जरूरत है। इससे विभाग पहले से तैयारी कर सकेगा और आम लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
ट्रांसमिशन के हर उपकरण का तैयार होगा डेटाबेस
डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि ट्रांसमिशन क्षेत्र में भी इसी दिशा में काम किया जा रहा है। हर ट्रांसफॉर्मर और प्रत्येक महत्वपूर्ण विद्युत उपकरण का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।
इस डेटाबेस में यह जानकारी दर्ज की जाएगी कि ट्रांसफॉर्मर या उपकरण कब लगाया गया, संबंधित बे कब बना और उसकी औसत लाइफ एक्सपेक्टेंसी कितनी है। इसके आधार पर विभाग यह आकलन कर सकेगा कि कोई उपकरण कब सिस्टम से बाहर होने की स्थिति में पहुंच सकता है।
लाइफ एक्सपेक्टेंसी के आधार पर उपकरण को खराब होने से पहले रिप्लेस करने या उसका बैकअप तैयार रखने की योजना बनाई जा सकेगी। इससे बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने में मदद मिलेगी।
भागलपुर से रहा है डॉ. नवल किशोर चौधरी का जुड़ाव
डॉ. नवल किशोर चौधरी पूर्व में भागलपुर के जिलाधिकारी के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कई महत्वपूर्ण कार्यों को आज भी भागलपुर के लोग याद करते हैं।
