शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर का दायरा होगा ‘ड्रग-फ्री जोन’, नशे के खिलाफ सख्ती के निर्देश

बिहार में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर 8वीं NCORD की उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम निर्देश दिए गए। शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री जोन’ के रूप में प्रभावी करने, सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाने और रेलवे परिसरों व ट्रेनों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया। साथ ही NDPS Act के मामलों, नशा मुक्ति केंद्रों और संगठित तस्करी में शामिल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
भागलपुर | BLive डेस्क:
मुख्य सचिव, बिहार सरकार की अध्यक्षता में आयोजित 8वीं NCORD (State Level Narcotics Control Bureau) की उच्चस्तरीय बैठक में बिहार में मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर के दायरे को ‘ड्रग-फ्री जोन’ घोषित कर इसे प्रभावी रूप से लागू करने का निर्देश दिया गया। इस संबंध में मद्य निषेध एवं राज्य स्तरीय मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो की ओर से सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश भेजे जाने की जानकारी दी गई।
सीमावर्ती इलाकों और रेलवे पर बढ़ेगी निगरानी
मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए सीमावर्ती जिलों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही रेलवे परिसरों और ट्रेनों के माध्यम से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
बैठक में पिछले पांच वर्षों के दौरान NDPS Act के तहत दर्ज मामलों, गिरफ्तार आरोपियों और जब्त किए गए मादक पदार्थों की विस्तृत समीक्षा भी की गई। इसमें गांजा, हेरोइन, स्मैक, कोकीन, अफीम और कफ सिरप समेत अन्य नशीले पदार्थों से संबंधित कार्रवाई के आंकड़ों पर चर्चा हुई।
2026 में जुलाई तक की कार्रवाई की भी समीक्षा
बैठक में वर्ष 2026 में जुलाई तक NDPS Act के तहत दर्ज मामलों में हुई गिरफ्तारियों और जब्ती की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में तलाशी, जब्ती, नमूना संग्रह और अनुसंधान की निर्धारित प्रक्रिया यानी SOP का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
नशा मुक्ति केंद्रों की व्यवस्था पर भी जोर
बैठक में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के संचालन की भी समीक्षा की गई। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 के तहत पंजीकृत नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों (IRCA और DDAC) के संचालन और उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करते हुए केंद्रों की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
संगठित तस्करी पर कसेगा शिकंजा
मादक पदार्थों की संगठित तस्करी में शामिल खतरनाक अपराधियों के खिलाफ के तहत प्रस्ताव तैयार कर गृह विभाग को भेजे जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य संगठित रूप से नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
