भागलपुर, बिहार

क्रिएटर लॉगिन
B Live Logo
BhagalpurLIVEआपका शहर, आपकी खबर
होमराजनीतिखेलमनोरंजनव्यापारतकनीकजीवनशैलीशिक्षारोजगारप्रशासनप्रदेशदेशविदेश
B Live Logo
BhagalpurLiveआपका शहर, आपकी खबर
हमारे बारे मेंसभी खबरेंगोपनीयता नीतिक्रिएटरएडमिन

© 2026 Bhagalpur Live | सर्वाधिकार सुरक्षित

Back to Home
January 29, 2026

यूजीसी के नए नियमों पर कोर्ट की रोक, जाति-आधारित परिभाषा पर बढ़ा विवाद

By Prashant Mishra

यूजीसी द्वारा जारी नए नियमों को लेकर उठे विवाद पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए रेगुलेशन 3(c) पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है। इस प्रावधान में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC तक सीमित किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। कोर्ट ने मामले को संवैधानिक महत्व का बताते हुए यूजीसी और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में नियमों के भविष्य पर फैसला होगा।

हाईकोर्ट ने रेगुलेशन 3(c) पर लगाया अंतरिम स्टे नई दिल्ली | BLive News विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद पर अब न्यायिक हस्तक्षेप भी हो गया है। हाईकोर्ट ने यूजीसी के विवादित रेगुलेशन 3(c) पर अंतरिम रोक (Stay) लगा दी है, जिससे इन नियमों के क्रियान्वयन पर फिलहाल विराम लग गया है। क्या है पूरा मामला यूजीसी के नए नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से निपटने के लिए एक सुदृढ़ तंत्र तैयार करना था। इसके तहत समान अवसर केंद्र (EOC), समानता समितियों औरयूजीसी द्वारा जारी नए नियमों को लेकर उठे विवाद पर कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए रेगुलेशन 3(c) पर अंतरिम रोक (स्टे) लगा दी है। इस प्रावधान में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को केवल SC, ST और OBC तक सीमित किए जाने पर आपत्ति जताई गई थी। कोर्ट ने मामले को संवैधानिक महत्व का बताते हुए यूजीसी और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में नियमों के भविष्य पर फैसला होगा। 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन की व्यवस्था अनिवार्य की गई। हालांकि, रेगुलेशन 3(c) में “जाति-आधारित भेदभाव” की परिभाषा को केवल अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तक सीमित कर दिया गया, जिसे लेकर व्यापक आपत्ति दर्ज की गई। याचिकाकर्ताओं की दलील अधिवक्ता विनीत जिंदल और राहुल दीवान द्वारा दायर याचिकाओं में कहा गया कि— ▪️ ये नियम गैर-समावेशी हैं ▪️ सामान्य/गैर-आरक्षित वर्ग को शिकायत के अधिकार से वंचित करते हैं ▪️ संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15(1) का उल्लंघन करते हैं याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि नियम यह मानकर चलते हैं कि भेदभाव केवल एक ही दिशा में हो सकता है, जबकि “रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन” की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। कोर्ट का रुख मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि यह विषय संवेदनशील और संविधानिक व्याख्या से जुड़ा है। इसी आधार पर कोर्ट ने रेगुलेशन 3(c) के क्रियान्वयन पर अंतरिम स्टे लगाते हुए यूजीसी और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है। सरकार और यूजीसी का पक्ष सरकार और यूजीसी ने अदालत में दलील दी कि ये नियम ▪️ ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों की सुरक्षा ▪️ उच्च शिक्षण संस्थानों में समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। यूजीसी का कहना है कि यह कदम एक पुरानी जनहित याचिका (PIL) के संदर्भ में उठाया गया था। आगे क्या अब इस मामले पर अगली सुनवाई में कोर्ट यह तय करेगा कि ▪️ यूजीसी के नए नियमों में संशोधन होगा या नहीं ▪️ स्टे आगे भी जारी रहेगा या हटाया जाएगा फिलहाल, रेगुलेशन 3(c) लागू नहीं होगा और उच्च शिक्षण संस्थानों को इस प्रावधान के तहत कोई कार्रवाई करने से रोका गया है। BLive News इस अहम शैक्षणिक और कानूनी मुद्दे से जुड़ी हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

Related Articles