बिहार के शिक्षकों का ‘7वें वेतनमान’ को लेकर X पर डिजिटल अभियान शुरू, #BiharTeachersNeed7thPay कर रहा ट्रेंड

बिहार के शिक्षकों ने सातवें वेतनमान की मांग को लेकर रविवार, 30 अगस्त को सुबह 11 बजे से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग के साथ डिजिटल अभियान शुरू किया। अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षक पोस्ट और रीपोस्ट के जरिए सरकार से स्पष्ट निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद उन्हें अपेक्षित वेतनमान नहीं मिल रहा है।
पटना | BLiveडेस्क
बिहार के शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही सातवें वेतनमान की मांग को लेकर रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डिजिटल अभियान शुरू हो गया। शिक्षकों और शिक्षक संगठनों से जुड़े लोगों ने सुबह 11 बजे से #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग के साथ लगातार पोस्ट और रीपोस्ट कर सरकार के सामने अपनी मांग रखनी शुरू की।
अभियान से जुड़े पोस्टों में बिहार के लगभग 6 लाख शिक्षकों के वेतनमान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से कम वेतनमान पर कार्य कर रहे हैं और समान काम के बदले समान एवं न्यायसंगत वेतन की मांग कर रहे हैं।
11 बजे से शुरू हुआ डिजिटल महाअभियान
अभियान की शुरुआत से पहले ही सोशल मीडिया पर शिक्षकों से अपील की गई थी कि वे रविवार, 30 अगस्त को सुबह 11 बजे से एकजुट होकर X पर अपनी आवाज उठाएं। इसके लिए #BiharTeachersNeed7thPay हैशटैग को अभियान का मुख्य माध्यम बनाया गया।
स्क्रीनशॉट में दिख रहे पोस्टों के अनुसार, अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षक संगठन और सोशल मीडिया यूजर्स पोस्ट, रीपोस्ट और अन्य माध्यमों से भागीदारी कर रहे हैं। कई पोस्टों में बिहार सरकार और शिक्षा विभाग से जुड़े प्रमुख आधिकारिक हैंडल को भी टैग किया गया है।
“राज्यकर्मी हैं, तो कम वेतन क्यों?”
डिजिटल अभियान में सबसे प्रमुख सवाल यही उठाया जा रहा है कि जब बिहार के शिक्षक राज्य सरकार के अधीन कार्य कर रहे हैं, तो उन्हें पूर्ण वेतनमान और सातवें वेतन आयोग के अनुरूप लाभ कब मिलेगा।
अभियान से जुड़े पोस्टों में कहा गया है कि राज्यकर्मी का दर्जा मिलने के बावजूद शिक्षकों को अपेक्षित वेतनमान नहीं मिल रहा है। शिक्षकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से इस संबंध में स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है।
एक पोस्ट में मांग उठाई गई कि राज्य सरकार के सरकारी सेवक होने के कारण शिक्षकों के मूल वेतन और भत्तों का निर्धारण 7th Pay Commission और फिटमेंट मैट्रिक्स के अनुरूप किया जाना चाहिए।
पोस्ट और रीपोस्ट के जरिए बढ़ाई जा रही आवाज
अभियान के दौरान कई सोशल मीडिया यूजर्स ने शिक्षकों से लगातार ट्वीट/पोस्ट और रीपोस्ट करने की अपील की। अलग-अलग पोस्टरों और वीडियो संदेशों के माध्यम से शिक्षक समुदाय को एकजुट होकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मांग रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
