बिहार: शिक्षकों के मकान किराया भत्ता में गड़बड़ी पर शिक्षा विभाग सख्त, निदेशक ने सभी DEO को दिए सुधार के निर्देश

बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर मकान किराया भत्ता (HRA) निर्धारण में हो रही गड़बड़ी को सुधारने का निर्देश दिया है। समीक्षा में पाया गया कि कई अवर्गीकृत शहरों के 8 किमी दायरे में स्थित स्कूलों को नियम विरुद्ध वर्गीकृत शहर वाली बढ़ी हुई दर से भत्ता दिया जा रहा था। DEO को सभी स्कूलों को सही श्रेणी में चिन्हित कर पोर्टल पर अपडेट करने को कहा गया है।
पटना | BLive डेस्क
बिहार के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को एक अहम पत्र जारी करते हुए शिक्षकों के मकान किराया भत्ता (HRA) के निर्धारण में हो रही गड़बड़ियों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। यह पत्र प्राथमिक शिक्षा निदेशक कुमार निशांत विवेक द्वारा जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला
वित्त विभाग के 18 जून 2024 के संकल्प के अनुसार राज्य कर्मियों के लिए मकान किराया भत्ते की दरें इस प्रकार तय हैं:
- वर्ग-Y श्रेणी शहर (पटना, अर्बन एग्लोमरेशन): मूल वेतन का 20%
- वर्ग-Z श्रेणी शहर (राज्य के 34 नामित शहर): मूल वेतन का 10%
- अवर्गीकृत शहर: मूल वेतन का 7.5%
- ग्रामीण क्षेत्र: मूल वेतन का 5%
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि बिहार राज्य कर्मचारी (मकान किराया भत्ता) नियमावली, 1980 के नियम-4(ख)(ii) के तहत अवर्गीकृत शहरों की सीमा के 8 किलोमीटर की परिधि में स्थित विद्यालयों को भी बढ़ी हुई (वर्गीकृत शहर वाली) दर से भत्ता दिया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है।
नियम क्या कहता है
1980 की नियमावली के अनुसार, अगर किसी सरकारी सेवक का कार्यस्थल किसी अर्हक नगर (यानी वर्गीकृत शहर) के नजदीक हो, लेकिन आवास की कमी के कारण उसे उसी नगर में रहना पड़ रहा हो, तो उसे उस नगर के हिसाब से मकान किराया भत्ता दिया जा सकता है — बशर्ते:
- कार्यस्थल और अर्हक नगर की नगरपालिका सीमा के बीच की दूरी 8 किलोमीटर से अधिक न हो
- संबंधित कर्मी को आवास की कमी के कारण अनिवार्य रूप से उस नगर में रहना पड़ रहा हो
निदेशालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान केवल वर्गीकृत नगरों के संदर्भ में ही लागू होता है, अवर्गीकृत शहरों पर नहीं — और 8 किलोमीटर की दूरी का प्रमाण-पत्र देने के लिए सक्षम प्राधिकार हैं।
