JTMACCE परीक्षा विवाद: JSSC की कार्यशैली पर उठे सवाल, अभ्यर्थियों में नाराजगी
झारखंड माध्यमिक आचार्य (JTMACCE) परीक्षा में “Suspicious Activity” के कारण हजारों अभ्यर्थियों से एफिडेविट मांगा गया है। 10 अप्रैल की डेडलाइन के चलते Ranchi में भारी भीड़ उमड़ी है और JSSC की कार्यशैली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
झारखंड माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (JTMACCE-2025) को लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। परीक्षा के बाद कई अभ्यर्थियों के पोर्टल पर "Suspicious Activity" दिखाया गया, जिसके चलते उनका Answer Key जारी नहीं किया गया।
इस मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने संबंधित अभ्यर्थियों से 10 अप्रैल 2026 तक एफिडेविट जमा करने का निर्देश दिया है। लेकिन इस फैसले के बाद अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
Ranchi स्थित JSSC कार्यालय के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। हजारों अभ्यर्थी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। खास बात यह है कि केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से भी उम्मीदवार यहां पहुंच रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि अचानक एफिडेविट जमा करने का निर्देश मिलने से उन्हें बहुत कम समय मिला, जिससे उन्हें जल्दबाजी में नोटरी और अन्य जरूरी कागजात तैयार कराने पड़े। कई अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को ऑफलाइन बुलाना अव्यवहारिक है।
गौरतलब है कि आयोग ने उन अभ्यर्थियों से एफिडेविट मांगा है जिनके परीक्षा के दौरान "Unauthorized login" या अन्य संदिग्ध गतिविधियों का संदेह जताया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि 10 अप्रैल तक एफिडेविट जमा नहीं करने पर अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया को लेकर JSSC की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों का मानना है कि आयोग को पहले स्पष्ट दिशा-निर्देश और ऑनलाइन सुविधा देनी चाहिए थी, जिससे इतनी अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनती।
फिलहाल, Ranchi में उमड़ती भीड़ और लंबी कतारें यह दिखा रही हैं कि यह मामला अब हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है और समय सीमा नजदीक आने के साथ तनाव और बढ़ता जा रहा है।
