बिहार शिक्षक ट्रांसफर पोर्टल पर आवेदन शुरू, कई समस्याओं से जूझ रहे शिक्षक; Mutual Transfer से लेकर Surplus तक उठे सवाल

बिहार में शिक्षक ट्रांसफर पोर्टल पर Rationalization और Mutual Transfer के विकल्प एक्टिव होने के बाद आवेदन शुरू हो गया है, लेकिन शिक्षकों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गृह प्रखंड का विकल्प नहीं मिलने, पति-पत्नी के आधार पर विकल्प स्पष्ट नहीं होने, जिला/प्रखंड चुनने के बाद स्कूल नहीं दिखने, एक वर्ष के भीतर ट्रांसफर हुए शिक्षकों को अपात्र बताए जाने और Surplus Teacher निर्धारण को लेकर शिक्षक सवाल उठा रहे हैं। शिक्षकों ने शिक्षा विभाग से पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को जल्द दूर करने और नियमों को अधिक स्पष्ट व व्यावहारिक बनाने की मांग की है।
पटना | BLive डेस्क
बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर लंबे इंतजार के बाद प्रक्रिया शुरू हो गई है। ट्रांसफर पोर्टल पर Rationalization (समायोजन) और Mutual Transfer (पारस्परिक स्थानांतरण) के विकल्प एक्टिव होने के बाद शिक्षक आवेदन में जुट गए हैं। हालांकि पोर्टल शुरू होते ही कई तरह की तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आने लगी हैं। शिक्षक सोशल मीडिया और विभिन्न शिक्षक समूहों में अपनी परेशानियां साझा कर रहे हैं।
सबसे अधिक शिकायतें गृह प्रखंड की बाध्यता, पति-पत्नी के आधार पर विकल्प, स्कूल और प्रखंड का विकल्प नहीं दिखने, एक वर्ष के भीतर ट्रांसफर वाले शिक्षकों की पात्रता और Surplus Teacher के निर्धारण को लेकर सामने आ रही हैं।
Mutual Transfer में गृह प्रखंड की बाध्यता पर आपत्ति
कई शिक्षकों ने Mutual Transfer में गृह प्रखंड से जुड़ी बाध्यता पर पुनर्विचार की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि जब दो शिक्षक आपसी सहमति से एक-दूसरे के स्थान पर स्थानांतरण चाहते हैं, तो ऐसी स्थिति में गृह प्रखंड की बाध्यता प्रक्रिया में परेशानी पैदा कर रही है।
शिक्षकों का तर्क है कि Mutual Transfer में दोनों शिक्षकों की सहमति होने के कारण विभाग को इस नियम को अधिक व्यावहारिक बनाने पर विचार करना चाहिए।
एक साल के भीतर ट्रांसफर हुए शिक्षकों को आवेदन में परेशानी
कुछ शिक्षकों का कहना है कि पोर्टल पर आवेदन के दौरान उन्हें पिछले एक वर्ष में स्थानांतरण होने के कारण अपात्र होने का संदेश दिखाई दे रहा है। पोर्टल पर ऐसे शिक्षकों को एक वर्ष पूरा होने के बाद दोबारा आवेदन करने की बात कही जा रही है।
इसे लेकर शिक्षक सवाल उठा रहे हैं कि पूर्व में Mutual Transfer सहित अन्य प्रक्रियाओं से स्थानांतरित शिक्षकों के मामले में नियम किस तरह लागू होगा। शिक्षक इस संबंध में विभाग से स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग कर रहे हैं।
जिला चुनने के बाद प्रखंड और स्कूल का विकल्प नहीं
पोर्टल पर एक बड़ी समस्या Choice Selection को लेकर भी सामने आ रही है। कई शिक्षकों का कहना है कि दूसरे जिले का चयन करने के बाद केवल जिले का विकल्प दिखाई दे रहा है, जबकि प्रखंड और विद्यालय चुनने का विकल्प उपलब्ध नहीं हो रहा।
