सरप्लस शिक्षकों के ट्रांसफर पर हाईकोर्ट का बड़ा अपडेट: रोक सभी पर नहीं, सिर्फ याचिकाकर्ताओं पर Status Quo

पटना हाईकोर्ट के 17 अगस्त 2026 के आदेश की स्पष्ट कॉपी सामने आने के बाद सरप्लस शिक्षकों के ट्रांसफर मामले में तस्वीर साफ हुई है। Status Quo सभी सरप्लस शिक्षकों पर नहीं, बल्कि इस मामले के याचिकाकर्ताओं की Posting और Transfer पर लागू है। गैर-याचिकाकर्ता शिक्षकों के ट्रांसफर पर इस आदेश से सामान्य रोक नहीं लगाई गई है। राज्य सरकार को Affidavit दाखिल करना है और अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी।
पटना | BLive डेस्क
बिहार के सरप्लस शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर कल से चल रही बड़ी खबर पर अब महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण सामने आया है। पटना हाईकोर्ट के 17 अगस्त 2026 के आदेश की उपलब्ध कॉपी को ध्यान से पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि Status Quo का आदेश सभी सरप्लस शिक्षकों के ट्रांसफर पर नहीं, बल्कि इस मामले के याचिकाकर्ताओं (Petitioners) की Posting और Transfer के संबंध में दिया गया है।
यानी, जिन शिक्षकों ने इस मामले में याचिका दायर नहीं की है, उनके सरप्लस शिक्षक के रूप में ट्रांसफर पर इस आदेश से कोई सामान्य रोक नहीं लगाई गई है।
कोर्ट के आदेश में क्या लिखा है?
पटना हाईकोर्ट के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है:
“Till the next date of hearing, status quo, as existing today, shall be maintained with regard to the petitioners’ posting and transfer.”
इसका सीधा अर्थ है कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता शिक्षकों की वर्तमान Posting और Transfer की स्थिति में बदलाव नहीं किया जाएगा।
मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
तो क्या अन्य सरप्लस शिक्षकों का ट्रांसफर हो सकता है?
उपलब्ध आदेश के आधार पर महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने सभी सरप्लस शिक्षकों के ट्रांसफर पर रोक लगाने का कोई व्यापक आदेश नहीं दिया है।
इसलिए जिन शिक्षकों ने इस मामले में याचिका दायर नहीं की है, उनके लिए Rationalisation/Surplus Teacher Transfer की प्रक्रिया पर इस आदेश से स्वतः रोक लगती हुई दिखाई नहीं देती।
हालांकि, अंतिम प्रशासनिक स्थिति शिक्षा विभाग के आगामी निर्देशों और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदमों से ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
याचिकाकर्ताओं ने किन बातों पर उठाए सवाल?
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से शिक्षा नीति और शिक्षकों के बार-बार स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
कोर्ट के आदेश में दर्ज दलील के अनुसार, Education Policy में शिक्षकों को “seldom to be transferred” यानी सामान्य परिस्थितियों में कम स्थानांतरित किए जाने की नीति का उल्लेख है।
