System फेल, सजा छात्रों को! 🔥 2800 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा पर बवाल

JSSC की माध्यमिक आचार्य परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ी के कारण हजारों अभ्यर्थियों को “Suspicious Activity” दिखाया गया, जबकि छात्र इसे सिस्टम की गलती बता रहे हैं। बिना आपत्ति का मौका दिए फाइनल आंसर की जारी करने के बाद अब करीब 2800 छात्रों की पुनर्परीक्षा का निर्णय लिया गया है, जिसे लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है और वे कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
रांची | BLive डेस्क
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2025 को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
पूरे घटनाक्रम में अब सवाल छात्रों पर नहीं, बल्कि JSSC की कार्यप्रणाली और सिस्टम की पारदर्शिता पर उठ रहे हैं।
🔍 क्या है पूरा मामला? (Step-by-Step Timeline)
➡️ जनवरी 2026:
परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित हुई, सभी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
➡️ 23 मार्च 2026:
काफी देरी के बाद आंसर की जारी की गई।
➡️ इसी दिन सामने आई बड़ी समस्या:
लगभग 3000–4000 अभ्यर्थियों के पोर्टल पर
“Error 5C / Suspicious Activity” का मैसेज दिखा।
➡️ छात्रों ने किया विरोध और शिकायत:
अभ्यर्थियों ने JSSC कार्यालय में आवेदन देकर कहा कि
👉 उन्होंने कोई गलत गतिविधि नहीं की
👉 यह सिस्टम/सेंटर की तकनीकी गड़बड़ी है
➡️ JSSC का आश्वासन:
आयोग ने कहा कि छात्र एफिडेविट देकर 10 तारीख तक आवेदन करें,
फिर उनकी समस्या का समाधान किया जाएगा।
➡️ लेकिन यहां हुआ बड़ा विवाद:
👉 छात्रों ने एफिडेविट जमा कर दिया
👉 इसके बावजूद फाइनल आंसर की जारी कर दी गई
👉 जबकि हजारों छात्रों को आपत्ति दर्ज करने का मौका ही नहीं मिला
⚠️ अब नया फैसला—पुनर्परीक्षा
अब JSSC ने नोटिस जारी कर कहा है कि
👉 करीब 2800 अभ्यर्थियों की पुनर्परीक्षा 8 मई 2026 को होगी
लेकिन सवाल यही उठ रहा है कि—
👉 जब गलती सिस्टम या सेंटर की थी,
👉 तो छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा है?
⚖️ छात्रों में आक्रोश, कोर्ट जाने की तैयारी
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प्रभावित अभ्यर्थी इस फैसले से नाराज हैं
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कई छात्र इसे अन्यायपूर्ण और एकतरफा निर्णय बता रहे हैं
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अब छात्र हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं
❗ सबसे बड़ा सवाल
👉 क्या बिना छात्रों की गलती के उनकी परीक्षा रद्द करना सही है?
